कोई बोलै राम राम कोई खुदाइ ॥ कोई सेवै गुसईआ कोई अलाहि ॥
कोई बोलै राम राम कोई खुदाइ ॥ कोई सेवै गुसईआ कोई अलाहि ॥
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सिख धर्म की शहादतें मानवता और मानवीय धर्म की रक्षा के लिए मिसल हैं, न कि स्वार्थ, जर, जोरु और जमीन के लिए।
सिख धर्म के संस्थापक, गुरु नानक देव जी ने अपने उपदेशों में मानवता, प्रेम, सेवा, परिश्रम, परोपकार और भाई-चारे की महत्ता पर जोर दिया था।
"सिख धर्म के इतिहास में कई शहीदों ने अपने प्राण न्योछावर कर दिए, लेकिन उनकी शहादतें स्वार्थ या व्यक्तिगत हितों के लिए नहीं थीं। उन्होंने मानवता और मानवीय धर्म की रक्षा के लिए अपने प्राण दिए। सिख धर्म के दसवें गुरु, गुरु गोबिंद सिंह जी ने खालसा पंथ की स्थापना की और सिखों को मानवता और मानवीय धर्म की रक्षा के लिए लड़ने का संदेश दिया।": जी. एस. लबाना
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साहिब श्री गुरुग्रंथ साहिब जी महाराज में अंग (पृष्ठ) 885 पर राग रामकली में पंचम पातशाह साहिब श्री गुरु अर्जुनदेव जी महाराज की वाणी दर्ज है।
जो मनुख को प्रभु परमात्मा से जोड़ने के साथ मानव जीवन में भाईचारा और एकता की मिसाल है :
गुरुवाणी शब्द पंजाबी/ हिन्दी/अंग्रेजी में ट्रांसलेट किया हुआ अर्थ सहित है इसके साथ इस गुरुवाणी शब्द को रागी भाई सतविंदर सिंह-भाई रविन्द्र सिंह (दिल्ली वाले) ने मधुर आवाज में गाकर वीडियो रिकार्डिंग में शब्दानुवार मंदिर-मस्जिद, चर्च-गुरुद्वारों के दृश्यों को संग्रहित कर दर्शाया है ।
वीडियो का लिंक भी नीचे दिया गया है ।
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अत: इस गुरुवाणी शब्द को अर्थ सहित पढ़कर और संगीत मय लय सुर ताल में सुनकर आत्मिक आनंद प्राप्त करें : 👇🏻
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ਰਾਮਕਲੀ ਮਹਲਾ ੫ ॥
ਕੋਈ ਬੋਲੈ ਰਾਮ ਰਾਮ ਕੋਈ ਖੁਦਾਇ ॥ ਕੋਈ ਸੇਵੈ ਗੁਸਈਆ ਕੋਈ ਅਲਾਹਿ ॥੧॥
ਕਾਰਣ ਕਰਣ ਕਰੀਮ ॥ ਕਿਰਪਾ ਧਾਰਿ ਰਹੀਮ ॥੧॥ ਰਹਾਉ ॥
ਕੋਈ ਨਾਵੈ ਤੀਰਥਿ ਕੋਈ ਹਜ ਜਾਇ ॥ ਕੋਈ ਕਰੈ ਪੂਜਾ ਕੋਈ ਸਿਰੁ ਨਿਵਾਇ ॥੨॥
ਕੋਈ ਪੜੈ ਬੇਦ ਕੋਈ ਕਤੇਬ ॥ ਕੋਈ ਓਢੈ ਨੀਲ ਕੋਈ ਸੁਪੇਦ ॥੩॥
ਕੋਈ ਕਹੈ ਤੁਰਕੁ ਕੋਈ ਕਹੈ ਹਿੰਦੂ ॥ ਕੋਈ ਬਾਛੈ ਭਿਸਤੁ ਕੋਈ ਸੁਰਗਿੰਦੂ ॥੪॥
ਕਹੁ ਨਾਨਕ ਜਿਨਿ ਹੁਕਮੁ ਪਛਾਤਾ ॥ ਪ੍ਰਭ ਸਾਹਿਬ ਕਾ ਤਿਨਿ ਭੇਦੁ ਜਾਤਾ ॥੫॥੯॥
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ਅਰਥ:
ਹੇ ਭਾਈ! ਕੋਈ ਮਨੁੱਖ (ਪਰਮਾਤਮਾ ਦਾ ਨਾਮ) 'ਰਾਮ ਰਾਮ' ਉਚਾਰਦਾ ਹੈ, ਕੋਈ ਉਸ ਨੂੰ 'ਖ਼ੁਦਾਇ, ਖ਼ੁਦਾਇ' ਆਖਦਾ ਹੈ ।
ਕੋਈ ਮਨੁੱਖ ਉਸ ਨੂੰ 'ਗੋਸਾਈਂ' ਆਖ ਕੇ ਉਸ ਦੀ ਭਗਤੀ ਕਰਦਾ ਹੈ, ਕੋਈ 'ਅੱਲਾ' ਆਖ ਕੇ ਬੰਦਗੀ ਕਰਦਾ ਹੈ ॥੧॥
ਹੇ ਸਾਰੇ ਜਗਤ ਦੇ ਮੂਲ! ਹੇ ਬਖ਼ਸ਼ਿੰਦ!
ਹੇ ਕਿਰਪਾਲ! ਹੇ ਰਹਿਮ ਕਰਨ ਵਾਲੇ! (ਜੀਵਾਂ ਨੇ ਆਪੋ ਆਪਣੇ ਧਰਮ-ਪੁਸਤਕਾਂ ਦੀ ਬੋਲੀ ਅਨੁਸਾਰ ਤੇਰੇ ਵਖ ਵਖ ਨਾਮ ਰੱਖੇ ਹੋਏ ਹਨ, ਪਰ ਤੂੰ ਸਭ ਦਾ ਸਾਂਝਾ ਹੈਂ) ॥੧॥ ਰਹਾਉ ॥
ਹੇ ਭਾਈ! ਕੋਈ ਮਨੁੱਖ ਕਿਸੇ ਤੀਰਥ ਉਤੇ ਇਸ਼ਨਾਨ ਕਰਦਾ ਹੈ, ਕੋਈ ਮਨੁੱਖ (ਮੱਕੇ) ਹੱਜ ਕਰਨ ਵਾਸਤੇ ਜਾਂਦਾ ਹੈ ।
ਕੋਈ ਮਨੁੱਖ (ਪ੍ਰਭੂ ਦੀ ਮੂਰਤੀ ਬਣਾ ਕੇ) ਪੂਜਾ ਕਰਦਾ ਹੈ, ਕੋਈ ਨਮਾਜ਼ ਪੜ੍ਹਦਾ ਹੈ ॥੨॥
ਹੇ ਭਾਈ! ਕੋਈ (ਹਿੰਦੂ) ਵੇਦ ਆਦਿਕ ਧਰਮ-ਪੁਸਤਕ ਪੜ੍ਹਦਾ ਹੈ, ਕੋਈ (ਮੁਸਲਮਾਨ ਆਦਿਕ) ਕੁਰਾਨ ਅੰਜੀਲ ਆਦਿਕ ਪੜ੍ਹਦਾ ਹੈ ।
ਕੋਈ (ਮੁਸਲਮਾਨ ਹੋ ਕੇ) ਨੀਲੇ ਕੱਪੜੇ ਪਹਿਨਦਾ ਹੈ, ਕੋਈ (ਹਿੰਦੂ) ਚਿੱਟੇ ਬਸਤ੍ਰ ਪਾਂਦਾ ਹੈ ॥੩॥
ਹੇ ਭਾਈ! ਕੋਈ ਮਨੁੱਖ ਆਖਦਾ ਹੈ 'ਮੈਂ ਮੁਸਲਮਾਨ ਹਾਂ', ਕੋਈ ਆਖਦਾ ਹੈ 'ਮੈਂ ਹਿੰਦੂ ਹਾਂ' ।
ਕੋਈ ਮਨੁੱਖ (ਪਰਮਾਤਮਾ ਪਾਸੋਂ) ਬਹਿਸ਼ਤ ਮੰਗਦਾ ਹੈ, ਕੋਈ ਸੁਰਗ ਮੰਗਦਾ ਹੈ ॥੪॥
ਨਾਨਕ ਆਖਦਾ ਹੈ- ਜਿਸ ਮਨੁੱਖ ਨੇ ਪਰਮਾਤਮਾ ਦਾ ਹੁਕਮ ਪਛਾਣਿਆ ਹੈ,
ਉਸ ਨੇ ਮਾਲਕ-ਪ੍ਰਭੂ ਦਾ ਭੇਤ ਪਾ ਲਿਆ ਹੈ (ਕਿ ਉਸ ਨੂੰ ਕਿਵੇਂ ਪ੍ਰਸੰਨ ਕਰ ਸਕੀਦਾ ਹੈ) ॥੫॥੯॥
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हिन्दी ट्रांसलेट :
रामकली महला ५ ॥
कोई बोलै राम राम कोई खुदाइ ॥ कोई सेवै गुसईआ कोई अलाहि ॥१॥
कारण करण करीम ॥ किरपा धारि रहीम ॥१॥ रहाउ ॥
कोई नावै तीरथि कोई हज जाइ ॥ कोई करै पूजा कोई सिरु निवाइ ॥२॥
कोई पड़ै बेद कोई कतेब ॥ कोई ओढै नील कोई सुपेद ॥३॥
कोई कहै तुरकु कोई कहै हिंदू ॥ कोई बाछै भिसतु कोई सुरगिंदू ॥४॥
कहु नानक जिनि हुकमु पछाता ॥ प्रभ साहिब का तिनि भेदु जाता ॥५॥९॥
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अर्थ : हिन्दी ट्रांसलेट :
रामकली महला ५ ॥
ईश्वर तो एक ही है, पर कोई उसे राम-राम बोल रहा है और कोई खुदा कह रहा है।
कोई गुसाँई की उपासना करता है और कोई अल्लाह की बंदगी कर रहा है॥ १॥
सबकी रचना करने वाला वह परमपिता बड़ा दयालु,
कृपा का घर एवं रहमदिल है॥ १॥ रहाउ ॥
कोई तीर्थों पर स्नान करता है तो कोई हज करने के लिए मक्का जाता है।
कोई पूजा-अर्चना करता है तो कोई सिर झुका कर सिजदा करता है॥ २॥
कोई वेद पढ़ता है तो कोई कुरान पढ़ता है।
कोई नीले वस्त्र पहनता है, कोई सफेद वस्त्र धारण करता है॥ ३॥
कोई स्वयं को मुसलमान कहता है और कोई हिन्दू कहता है।
कोई बिहिश्त की तमन्ना करता है, तो कोई स्वर्ग की कामना करता है॥ ४॥
हे नानक ! जिसने ईश्वर के हुक्म को पहचान लिया है,
उसने मालिक-प्रभु का भेद जान लिया है॥ ५ ॥ ९ ॥
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In English translation:
Raamakalee mahalaa 5 ||
Koee bolai raam raam koee khudaai || Koee sevai gusaeeaa koee alaahi ||1||
Kaara(nn) kara(nn) kareem || Kirapaa dhaari raheem ||1|| rahaau ||
Koee naavai teerathi koee haj jaai || Koee karai poojaa koee siru nivaai ||2||
Koee pa(rr)ai bed koee kateb || Koee odhai neel koee suped ||3||
Koee kahai turaku koee kahai hinddoo || Koee baachhai bhisatu koee suraginddoo ||4||
Kahu naanak jini hukamu pachhaataa || Prbh saahib kaa tini bhedu jaataa ||5||9||
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Meaning:
Raamkalee, Fifth Mehl:
Some call Him, 'Raam, Raam', and some call Him, 'Khudaa-i'.
Some serve Him as 'Gusain', others as 'Allah'. ||1||
He is the Cause of causes, the Generous Lord.
He showers His Grace and Mercy upon us. ||1|| Pause ||
Some bathe at sacred shrines of pilgrimage, and some make the pilgrimage to Mecca.|
Some perform devotional worship services, and some bow their heads in prayer. ||2||
Some read the Vedas, and some the Koran.
Some wear blue robes, and some wear white. ||3||
Some call themselves Muslim, and some call themselves Hindu.
Some yearn for paradise, and others long for heaven. ||4||
Says Nanak, one who realizes the Hukam of God's Will,
Knows the secrets of his Lord and Master. ||5||9||
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गुरुवाणी वीडियो सुने और वीडियो में दर्शाए दृश्य देखें
https://youtu.be/OZk4MKMk8Mw?si=U1v6XbNxgVz8SN95
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वाहेगुर जी
गोपाल सिंह लबाना
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