HUKAMNAMA SRI DARBAR SAHIB AMRITSAR Ang 666. Date 16-11-2024

 LABANA JAGRATI SANDESH


AMRIT VELE DA

 HUKAMNAMA SRI

 DARBAR SAHIB

 AMRITSAR 

 Ang 666.   Date 16-11-2024




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Amrit Wele Da Mukhwak Sachkhand  Sri Harmandir Sahib  Amritsar 16-11-24 Ang 666

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ਰਾਗੁ ਧਨਾਸਿਰੀ ਮਹਲਾ ੩ ਘਰੁ ੪ ੴ ਸਤਿਗੁਰ ਪ੍ਰਸਾਦਿ ॥ ਹਮ ਭੀਖਕ ਭੇਖਾਰੀ ਤੇਰੇ ਤੂ ਨਿਜ ਪਤਿ ਹੈ ਦਾਤਾ ॥ ਹੋਹੁ ਦੈਆਲ ਨਾਮੁ ਦੇਹੁ ਮੰਗਤ ਜਨ ਕੰਉ ਸਦਾ ਰਹਉ ਰੰਗਿ ਰਾਤਾ ॥੧॥ ਹੰਉ ਬਲਿਹਾਰੈ ਜਾਉ ਸਾਚੇ ਤੇਰੇ ਨਾਮ ਵਿਟਹੁ ॥ ਕਰਣ ਕਾਰਣ ਸਭਨਾ ਕਾ ਏਕੋ ਅਵਰੁ ਨ ਦੂਜਾ ਕੋਈ ॥੧॥ ਰਹਾਉ ॥ ਬਹੁਤੇ ਫੇਰ ਪਏ ਕਿਰਪਨ ਕਉ ਅਬ ਕਿਛੁ ਕਿਰਪਾ ਕੀਜੈ ॥ ਹੋਹੁ ਦਇਆਲ ਦਰਸਨੁ ਦੇਹੁ ਅਪੁਨਾ ਐਸੀ ਬਖਸ ਕਰੀਜੈ ॥੨॥ ਭਨਤਿ ਨਾਨਕ ਭਰਮ ਪਟ ਖੂਲ੍ਹ੍ਹੇ ਗੁਰ ਪਰਸਾਦੀ ਜਾਨਿਆ ॥ ਸਾਚੀ ਲਿਵ ਲਾਗੀ ਹੈ ਭੀਤਰਿ ਸਤਿਗੁਰ ਸਿਉ ਮਨੁ ਮਾਨਿਆ ॥੩॥੧॥੯॥

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ਅਰਥ: 

ਰਾਗ ਧਨਾਸਰੀ, ਘਰ ੪ ਵਿੱਚ ਗੁਰੂ ਅਮਰਦਾਸ ਜੀ ਦੀ ਬਾਣੀ।

 ਅਕਾਲ ਪੁਰਖ ਇੱਕ ਹੈ ਅਤੇ ਸਤਿਗੁਰੂ ਦੀ ਕਿਰਪਾ ਨਾਲ ਮਿਲਦਾ ਹੈ। ਹੇ ਪ੍ਰਭੂ! ਅਸੀਂ ਜੀਵ ਤੇਰੇ (ਦਰ ਦੇ) ਮੰਗਤੇ ਹਾਂ, ਤੂੰ ਸੁਤੰਤਰ ਰਹਿ ਕੇ ਸਭ ਨੂੰ ਦਾਤਾਂ ਦੇਣ ਵਾਲਾ ਹੈਂ। ਹੇ ਪ੍ਰਭੂ! ਮੇਰੇ ਉਤੇ ਦਇਆਵਾਨ ਹੋ। ਮੈਨੂੰ ਮੰਗਤੇ ਨੂੰ ਆਪਣਾ ਨਾਮ ਦੇਹ (ਤਾ ਕਿ) ਮੈਂ ਸਦਾ ਤੇਰੇ ਪ੍ਰੇਮ-ਰੰਗ ਵਿਚ ਰੰਗਿਆ ਰਹਾਂ ॥੧॥ 

ਹੇ ਪ੍ਰਭੂ! ਮੈਂ ਤੇਰੇ ਸਦਾ ਕਾਇਮ ਰਹਿਣ ਵਾਲੇ ਨਾਮ ਤੋਂ ਸਦਕੇ ਜਾਂਦਾ ਹਾਂ। ਤੂੰ ਸਾਰੇ ਜਗਤ ਦਾ ਮੂਲ ਹੈਂ; ਤੂੰ ਹੀ ਸਭ ਜੀਵਾਂ ਦਾ ਪੈਦਾ ਕਰਨ ਵਾਲਾ ਹੈਂ ਕੋਈ ਹੋਰ (ਤੇਰੇ ਵਰਗਾ) ਨਹੀਂ ਹੈ ॥੧॥ ਰਹਾਉ ॥ 

ਹੇ ਪ੍ਰਭੂ! ਮੈਨੂੰ ਮਾਇਆ-ਵੇੜ੍ਹੇ ਨੂੰ (ਹੁਣ ਤਕ ਮਰਨ ਦੇ) ਅਨੇਕਾਂ ਗੇੜ ਪੈ ਚੁਕੇ ਹਨ, ਹੁਣ ਤਾਂ ਮੇਰੇ ਉਤੇ ਕੁਝ ਮੇਹਰ ਕਰ। ਹੇ ਪ੍ਰਭੂ! ਮੇਰੇ ਉਤੇ ਦਇਆਵਾਨ ਹੋ। ਮੇਰੇ ਉਤੇ ਇਹੋ ਜਿਹੀ ਬਖ਼ਸ਼ਸ਼ ਕਰ ਕਿ ਮੈਨੂੰ ਆਪਣਾ ਦੀਦਾਰ ਬਖ਼ਸ਼ ॥੨॥

 ਹੇ ਭਾਈ! ਨਾਨਕ ਜੀ ਆਖਦੇ ਹਨ – ਗੁਰੂ ਦੀ ਕਿਰਪਾ ਨਾਲ ਜਿਸ ਮਨੁੱਖ ਦੇ ਭਰਮ ਦੇ ਪਰਦੇ ਖੁਲ੍ਹ ਜਾਂਦੇ ਹਨ, ਉਸ ਦੀ (ਪਰਮਾਤਮਾ ਨਾਲ) ਡੂੰਘੀ ਸਾਂਝ ਬਣ ਜਾਂਦੀ ਹੈ। ਉਸ ਦੇ ਹਿਰਦੇ ਵਿਚ (ਪਰਮਾਤਮਾ ਨਾਲ) ਸਦਾ ਕਾਇਮ ਰਹਿਣ ਵਾਲੀ ਲਗਨ ਲੱਗ ਜਾਂਦੀ ਹੈ, ਗੁਰੂ ਨਾਲ ਉਸ ਦਾ ਮਨ ਪਤੀਜ ਜਾਂਦਾ ਹੈ ॥੩॥੧॥੯॥


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रागु धनासिरी महला ३ घरु ४ ੴ सतिगुर प्रसादि ॥ हम भीखक भेखारी तेरे तू निज पति है दाता ॥ होहु दैआल नामु देहु मंगत जन कंउ सदा रहउ रंगि राता ॥१॥ हंउ बलिहारै जाउ साचे तेरे नाम विटहु ॥ करण कारण सभना का एको अवरु न दूजा कोई ॥१॥ रहाउ ॥ बहुते फेर पए किरपन कउ अब किछु किरपा कीजै ॥ होहु दइआल दरसनु देहु अपुना ऐसी बखस करीजै ॥२॥ भनति नानक भरम पट खूल्हे गुर परसादी जानिआ ॥ साची लिव लागी है भीतरि सतिगुर सिउ मनु मानिआ ॥३॥१॥९॥

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अर्थ: 

राग धनासरी, घर ४ में गुरू अमरदास जी की बाणी। 

अकाल पुरख एक है और सतिगुरू की कृपा द्वारा मिलता है। 

हे प्रभू! हम जीव तेरे (द्वार के) भिखारी हैं, तूँ स्वतंत्र रह कर सब को दातें देने वाला हैं। हे प्रभू! मेरे पर दयावान हो। मुझे भिखारी को अपना नाम दो (ता कि) मैं सदा तेरे प्रेम-रंग में रंगा रहूँ ॥१॥

 हे प्रभू! मैं तेरे सदा कायम रहने वाले नाम से कुर्बान जाता हूँ। तूँ सारे संसार जगत का आधार हैं; तूँ ही सब जीवों को पैदा करने वाला हैं कोई अन्य (तेरे जैसा) नहीं है ॥१॥रहाउ ॥ 

हे प्रभू! मुझे माया-नीच को (अब तक मरण के) अनेकों चक्र पड़ चुके हैं, अब तो मेरे पर कुछ मेहर कर। हे प्रभू! मेरे पर दयावान हो। मेरे पर इस तरह की बख़्श़श़ कर कि मुझे अपना दीदार बख़्श़ ॥२॥ 

हे भाई! नानक जी कहते हैं – गुरू की कृपा द्वारा जिस मनुष्य के भ्रम के परदे खुल जाते हैं, उस की (परमात्मा के साथ) गहरी सांझ बन जाती है। उस के हृदय में (परमात्मा के साथ) सदा कायम रहने वाली लगन लग जाती है, गुरू के द्वारा उस का मन संतुष्ट हो जाता है ॥३॥१॥९॥

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English translation:

Raag Dhhanaasaree Mahalaa 3 Ghar 4 Ik Oankaar Satgur Parsaad || 

Ham Bheekhak Bhekhaaree Tere Too Nij Pat Hai Daataa || Hohu Deaal Naam Dehu Mangat Jan Kau Sadaa Rahau Rang Raataa ||1|| 

Hau Balehaarai Jaau Saache Tere Naam Vittahu || Karan Kaaran Sabhnaa Kaa Eko Avar N Doojaa Koee ||1|| Rahaau ||

 Bahute Fer Pae Kirpan Kau Ab Kishh Kirpaa Keejai || Hohu Daeaal Darsan Dehu Apunaa Aisee Bakhas Kareejai ||2|| 

Bhanat Naanak Bharam Patt Khooleh Gur Parsaadee Jaaneaa || Saachee Liv Laagee Hai Bheetar Satgur Siu Man Maaneaa ||3||1||9||

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Meaning:

 Raag Dhhanaasaree, Third Mahalaa, Fourth House: 

One Universal Creator God. By The Grace Of The True Guru: 

I am just a poor beggar of Yours; You are Your Own Lord Master, You are the Great Giver. Be Merciful, and bless me, a humble beggar, with Your Name, so that I may forever remain imbued with Your Love. ||1||

 I am a sacrifice to Your Name, O True Lord. The One Lord is the Cause of causes; there is no other at all. ||1|| Pause || 

I was wretched; I wandered through so many cycles of reincarnation. Now, Lord, please bless me with Your Grace. Be merciful, and grant me the Blessed Vision of Your Darshan; please grant me such a gift. ||2||

 Prays Nanak Ji, the shutters of doubt have been opened wide; by Guru’s Grace, I have come to know the Lord. I am filled to overflowing with true love; my mind is pleased and appeased by the True Guru. ||3||1||9||

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